Tuesday, June 24, 2008


परांठे वाली गली

वैसे आजकल न्‍यूज चैनलों में खाना खजाना जैसे ढ़ेर सारे कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं। लेकिन ऊपर दिए गए शीर्षक से मेरा ऐसा कुछ करने का इरादा नहीं है। वो तो बस ऐसी ही कॉलेज के दिनों की याद आ गई। जब कभी भी मेरा और मेरे साथियों का नोएडा से दिल्‍ली जाना हुआ करता था तो हम बस परांठे वाली गली की ओर बरबस ही खींचे चले जाते थे। वैसे मुझे यहां पर परांठे वाली गली के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। भला, दिल्‍ली के मशहूर चांदनी चौक की मशहूर परांठे वाली गली को कौन नहीं जानता। इस गली की छोटी-छोटी दुकानों में कई तरह के परांठों को घी में सेंके जाने की खुश्‍बू और साथ में दो तीन तरह की सब्‍जी और केले की चटनी के जायकेदार स्‍वाद को कम से कम दिल्‍ली के बाशिंदे और मुझ जैसे खाने के शौकीन तो जरूर ही जानते होंगे।


जब भी हम लोग किसी भी काम से दिल्‍ली जाया करते थे तो हम चांदनी चौक जाने की पूरी कोशिश करते थे। इतना ही हम लोग सिर्फ परांठे खाने के लिए नोएडा से दिल्‍ली जाते थे। हम लोग परांठे वाली गली जाकर परांठे तो खाते ही थे साथ में रबड़ी और उसके बाद फ्रूट चाट। और लौटते हुए मंदिर से पेड़े खरीदना नहीं भूलते थे। कई बार तो हम लोगों के पास घर जाने के लिए पैसे भी नहीं बचते थे। ऐसी हालत में हम में से जिस किसी के भी एटीएम में जो थोड़े बहुत पैसे हुआ करते थे उसे हम निकालकर घर जाने का इंतजाम कर पाते थे। हालांकि कॉलेज पूरा होने के बाद फिर कभी ऐसा मौका नहीं मिला। लेकिन हां, अब भी इस तरह से जाने की इच्‍छा जरूर करती है। आखिर, परांठे वाली गली का मोह छोड़ना इतना आसान भी तो