हैवानियत
पटना के गाँव नौबतपुर कि लाल परी के साथ जो कुछ भी हुआ वो इंसानियत का घिनोना चेहरा नहीं तो और क्या है. जब किसी को किसी देवता का खौफ नहीं होता तो एक आम महिला को डायन बनाने में गर्व क्यों महसूस होता है. और उसके बालों को काटकर कहते हैं कि ऐसा करने से ऐसे महिला के ऊपर से दुश्प्रवार्तियाँ चली जाती हैं. यानि कि बाल से लेकर नाखून तक सबको ऐसा पाठ पढाओ कि दुबारा डायन क्या डायन कि माँ भी आने से घबराए. ये है हमारे तताकथित सभ्य समाज की हकीक़त. वैसे ये घटना है तो गाँव की लेकिन आधुनिकता, खुलेपन और साक्षरता के दावे करने वाली संस्थाओं और ऐन्ज्यो के मुहं पर ये करारा चाट्टा ही तो है. ये कोई पहली घटना नहीं है. बिहार में पिछले १५ सालों में अब तक कुल २५०० महिलाओं को डायन बताकर मारा डाला गया है. महिला शशक्तिकरण के महीने में हुई ये घटना हमे याद दिलाती है कि मंजिल अभी दूर है.
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